मोहाली : सरकारी रकम के गबन के मामले में मोहाली की स्पेशल कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी (बी एंड आर) मानसा के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (एक्सईएन) जोगिंदर सिंह को दोषी करार देते हुए तीन साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर दोषी को 30 दिन की अतिरिक्त कठोर कैद भुगतनी होगी।
अदालत ने रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की जांच के बाद पाया कि सरकारी रकम को कई बैंक खातों और एफडीआर के जरिए ट्रांसफर करते हुए अंत में आरोपी और उसकी पत्नी के निजी खाते में पहुंचाया गया। इसके बाद रकम का इस्तेमाल निजी खर्च और सोना खरीदने में किया गया।
56.79 लाख रुपये मुआवजे की रकम थी
मामला मानसा के गांव पेरू में पीडब्ल्यूडी की जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा है। यह जमीन तलवंडी साबो थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की गई थी। जमीन के मुआवजे के रूप में लैंड एक्विजिशन कलेक्टर-कम-एडीसी मानसा के खाते से 56.79 लाख रुपये का चेक जारी हुआ था। यह रकम पीडब्ल्यूडी (बी एंड आर) के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के सरकारी खाते में जमा हुई थी।
कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक इस रकम को सरकारी ट्रेजरी में जमा किया जाना था। आरोप था कि जोगिंदर सिंह ने रकम सरकारी खजाने में जमा कराने के बजाय दिसंबर 2008 में करीब 56 लाख रुपये की एफडीआर बनवा दी। बाद में दो डिमांड ड्राफ्ट रद्द होने से 2.07 लाख रुपये और खाते में आए, लेकिन इन रकमों की कैश बुक में एंट्री नहीं की गई। ब्याज जुड़ने के बाद जून 2009 तक रकम बढ़कर करीब 61.13 लाख रुपये हो गई।
सरकारी खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर बनाई एफडीआर
15 जुलाई 2009 को 61.13 लाख रुपये दूसरे बैंक के सरकारी खाते में ट्रांसफर किए गए। अगले दिन इस रकम की भी एफडीआर बना दी गई। पहले इसे 240 दिन के लिए रखा गया और बाद में इसकी अवधि बढ़ाई गई।
अगस्त 2011 में एफडीआर को समय से पहले भुनाया गया। उस समय ब्याज समेत रकम करीब 69.49 लाख रुपये हो चुकी थी। इसके बाद 4.50 लाख रुपये नकद निकाले गए, जबकि करीब 64.90 लाख रुपये का चेक जोगिंदर सिंह और उसकी पत्नी कमलजीत कौर के नाम से संचालित निजी एचडीएफसी बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया।
निजी खाते से लाखों रुपये निकालकर खरीदा सोना
अदालत ने अपने फैसले में बैंक लेनदेन को देखते हुए कहा कि सरकारी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करते हुए अंत में निजी खाते तक पहुंचाया गया। निजी खाते में रकम आने के बाद अक्टूबर 2011 में तीन बार 9.50-9.50 लाख रुपये निकाले गए।
इसके बाद इसी खाते से सोने की खरीद की गई। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार 20 अक्टूबर को 400 ग्राम और 850 ग्राम सोना खरीदा गया। अगले दिन भी अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से गोल्ड बिस्किट खरीदे गए। 21 अक्टूबर को 500 ग्राम, 250 ग्राम, 400 ग्राम और 600 ग्राम सोने की खरीद के भुगतान इसी निजी खाते से किए गए थे। सोने की खरीद से संबंधित बैंक रिकॉर्ड, इनवॉयस और आवश्यक फॉर्म भी अदालत में पेश किए गए थे।
409 में दोषी, भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की धाराओं से बरी
जोगिंदर सिंह के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो बठिंडा ने मामला दर्ज किया था। उस पर आईपीसी की धारा 409, 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) सहपठित 13(2) के तहत आरोप लगाए गए थे।
सुनवाई के बाद अदालत ने उसे आईपीसी की धारा 409 के तहत दोषी करार दिया, जबकि धारा 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) सहपठित 13(2) के आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने सरकारी रकम के दुरुपयोग और निजी खाते में पहुंचाए जाने को गंभीरता से लेते हुए तीन साल की कठोर कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।