गुवाहाटी (Naren Danu) : असम में बाढ़ की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है, लेकिन संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। राज्य के 441 गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं और 1,12,718 लोग प्रभावित हैं। हालांकि अधिकांश नदियों का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिससे कई जिलों में हालात सामान्य होने लगे हैं। दूसरी ओर, प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों के अलावा तटबंधों पर प्लास्टिक के टेंट लगाकर रहने को मजबूर हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। वह प्रतिदिन समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दे रहे हैं। मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा भी कर रहे हैं। प्रशासन के साथ स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय लोग भी राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।
दो नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 11 अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक धनसिरि नदी (नुमलीगढ़) और कुसियारा नदी (श्रीभूमि) अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
बाढ़ के कारण अब तक राज्य में 102 लोगों की मौत हो चुकी है। वर्तमान में गोलाघाट, शिवसागर, होजाई, जोरहाट, दरंग, लखीमपुर और नगांव जिले प्रभावित हैं। इन जिलों के 25 राजस्व मंडलों के 441 गांव बाढ़ से घिरे हैं।
बाढ़ के कारण 10,879.03 हेक्टेयर कृषि भूमि भी पानी में डूबी हुई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है।
67 मेडिकल टीमें मैदान में, 121 लोगों को सुरक्षित निकाला
प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार ने मंगलवार को 67 मेडिकल टीमें तैनात कीं। राहत एवं बचाव अभियान में एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, स्थानीय प्रशासन और प्रशिक्षित स्वयंसेवक जुटे हुए हैं।
राहत कार्यों के लिए 10 नावें भी लगाई गई हैं। इनके जरिए मंगलवार को 121 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
बाढ़ के चलते कई इलाकों में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। प्रशासन का फोकस प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ आवश्यक राहत सामग्री और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है।