अमृतसर (Narendra Singh Danu) : पिछले वर्ष रावी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ जैसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जल संसाधन विभाग ने अमृतसर और गुरदासपुर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर डी-सिल्टिंग (गाद हटाने) का अभियान शुरू किया है। विभाग का लक्ष्य मानसून के चरम दौर से पहले नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल कर बाढ़ के खतरे को कम करना है।
विभाग के अनुसार पिछले वर्ष मानसून के दौरान रावी नदी में आई बाढ़ से अमृतसर जिले में 23 स्थानों पर तटबंध टूट गए थे, जिससे 198 गांव प्रभावित हुए। इस आपदा में 10 लोगों की मौत हुई, 59,793 एकड़ फसल बर्बाद हो गई और 307 पशुओं की भी जान चली गई। अकेले धर्मकोट घोनेवाल कॉम्प्लेक्स में तटबंध छह स्थानों से टूट गया था।
1,825 करोड़ रुपये का हुआ था नुकसान
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 और 2025 में सतलुज, ब्यास और रावी नदी प्रणालियों में आई बाढ़ से 86 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि प्रभावित हुई, जिससे करीब 1,825 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।
गाद से घटी नदी की जल वहन क्षमता
बाढ़ के बाद किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण में पाया गया कि नदी में अत्यधिक गाद और मलबा जमा होने से उसका प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया है और जल वहन क्षमता काफी कम हो गई है। इसके बाद राष्ट्रीय सेडिमेंट प्रबंधन ढांचे के दिशा-निर्देशों के तहत विस्तृत परियोजना तैयार कर संयुक्त स्टेट टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी से मंजूरी ली गई।
डिजिटल निगरानी में चल रहा अभियान
जल संसाधन विभाग ने बताया कि डी-सिल्टिंग का पूरा कार्य डिजिटल जियो-फेंसिंग और कड़ी निगरानी में किया जा रहा है। निकाली जा रही गाद का उपयोग संवेदनशील तटबंधों को मजबूत करने, रेत की बोरियां भरने और आपातकालीन बाढ़ सुरक्षा कार्यों में किया जाएगा।
विभाग का कहना है कि मानसून के दौरान अमृतसर और गुरदासपुर के लोगों की जान-माल, फसलों और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान युद्ध स्तर पर जारी रहेगा।