परिसीमन, 'एक राष्ट्र-एक चुनाव', चुनाव आयोग, अयोध्या दान विवाद और चीन-अमेरिका नीति पर सरकार से जवाब मांगेगी कांग्रेस

नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने केंद्र सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस महासचिव एवं सांसद जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी संसद में विदेश नीति, बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, परिसीमन, 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' और अयोध्या राम मंदिर में कथित दान अनियमितताओं समेत कई मुद्दे प्रमुखता से उठाएगी।

शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, जबकि सरकार इन विषयों पर चर्चा से बच रही है।

SIR और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

उन्होंने कहा कि 24 विपक्षी दलों और निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है।

रमेश का आरोप है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में उचित हस्तक्षेप करेगा।

परिसीमन और 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' पर भी निशाना

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक और 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' से जुड़े प्रस्ताव फिर ला सकती है, जिनका कांग्रेस विरोध करेगी।

राम मंदिर दान और विदेश नीति पर भी सवाल

जयराम रमेश ने अयोध्या राम मंदिर में कथित दान अनियमितताओं के आरोपों का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया कि केदारनाथ और बदरीनाथ से जुड़े मामलों की भी जांच होनी चाहिए।

विदेश नीति पर उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में सुरक्षा बलों ने सफलता हासिल की, लेकिन कूटनीतिक मोर्चे पर सरकार को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे और अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी संसद में चर्चा की मांग की।

सरकार पर चर्चा से बचने का आरोप

जयराम रमेश ने कहा कि मानसून सत्र से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक महज औपचारिकता बनकर रह गई है। उनके अनुसार, विपक्ष की बात सुनी जरूर जाती है, लेकिन संसद का एजेंडा सरकार पहले से तय कर लेती है।