कोलकाता (Narendra Singh Danu) : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता स्थित वीआरएम बिजनेस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक राजेश गोयनका समेत अन्य आरोपितों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी के परिसर से संचालित फर्जी कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई।
ईडी के अनुसार, जांच के दौरान 2.35 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां और बैंक खाते जब्त एवं फ्रीज किए गए हैं, जबकि 11.14 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की गई हैं।
प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम पर की जाती थी ठगी
मामले की जांच इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स, बिधाननगर थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। आरोप है कि कॉल सेंटर के कर्मचारी खुद को नामी सेवा प्रदाता कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे और तकनीकी सहायता, सदस्यता नवीनीकरण या अन्य सेवाओं के नाम पर उनसे पैसे वसूलते थे, लेकिन कोई वास्तविक सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती थी।
20.35 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का आरोप
ईडी का दावा है कि वीआरएम बिजनेस सर्विसेज और उसके निदेशकों ने इस कथित धोखाधड़ी के जरिए कम से कम 20.35 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। जांच में आरोप है कि इस धन का इस्तेमाल आभूषण खरीदने, अचल संपत्तियां बनाने और अन्य निवेशों में किया गया।
एजेंसी ने राजेश गोयनका और उनकी कंपनी को कथित अपराध से अर्जित धन का प्रमुख लाभार्थी बताया है। साथ ही कॉल सेंटर के संचालकों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
विदेशी नागरिकों को बनाया जाता था निशाना
ईडी के मुताबिक, आरोपी इंटरनेट आधारित कॉलिंग के जरिए विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे और खुद को प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रतिनिधि बताते थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्हें झूठे बहानों से डराकर या भ्रमित कर तकनीकी सहायता, गिफ्ट वाउचर और अन्य कथित सेवाओं के नाम पर भुगतान कराया जाता था।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और ईडी अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।