IHI कॉर्पोरेशन और ACME ग्रुप के साथ समझौता; ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

भुवनेश्वर (Narendra Singh Danu) : ओडिशा सरकार ने जापान के साथ आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देते हुए आईएचआई कॉर्पोरेशन (IHI Corporation) और एसीएमई ग्रुप (ACME Group) के साथ 67 हजार करोड़ रुपये के निवेश संबंधी मेमोरेंडम ऑफ कोऑपरेशन (MoC) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस निवेश से राज्य में हरित ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने के साथ करीब 7 हजार प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

यह समझौता राज्य सरकार की ओर से आयोजित 'इंटरैक्शन विद जापानी बिजनेस डेलीगेट्स' कार्यक्रम के दौरान हुआ। सरकार का कहना है कि यह साझेदारी ओडिशा को स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में अहम कदम होगी।

ग्रीन अमोनिया और मेथनॉल परियोजनाओं पर बड़ा दांव

समझौते के तहत गोपालपुर-टाटा विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश से 0.4 एमटीपीए क्षमता का ग्रीन अमोनिया संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना से करीब 3,400 रोजगार मिलेंगे। इसके अलावा 1,000 करोड़ रुपये की लागत से जेटी-लेस फ्लोटिंग टर्मिनल भी बनाया जाएगा।

वहीं पारादीप में 34 हजार करोड़ रुपये के निवेश से 0.8 एमटीपीए क्षमता का दूसरा ग्रीन अमोनिया संयंत्र स्थापित होगा, जिससे करीब 3,600 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके साथ 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से ग्रीन मेथनॉल परियोजना भी विकसित की जाएगी।

CM बोले- औद्योगिक विकास का नया अध्याय

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि जापान भारत का सबसे भरोसेमंद विकास और निवेश साझेदार रहा है। उनके अनुसार यह समझौता 'समृद्ध ओडिशा-2036' और 'विकसित भारत-2047' के लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उद्योग एवं कौशल विकास मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने कहा कि निवेश-अनुकूल नीतियों, मजबूत आधारभूत ढांचे और पारदर्शी प्रशासन के कारण ओडिशा वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है।

भविष्य के निवेश का भी खुलेगा रास्ता

आईएचआई कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष हिरोशी इदे ने ओडिशा की रणनीतिक स्थिति और औद्योगिक क्षमता की सराहना की। वहीं एसीएमई ग्रुप के संस्थापक एवं अध्यक्ष मनोज उपाध्याय ने कहा कि यह साझेदारी भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में नई तकनीक और बड़े निवेश का मार्ग प्रशस्त करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, ग्रीन मेथनॉल, एयरोस्पेस, शिपबिल्डिंग, लॉजिस्टिक्स, इस्पात और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भविष्य के निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।