चंडीगढ़ (Narendra Singh Danu) : पंजाब कांग्रेस में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। प्रदेश अध्यक्ष पद नहीं मिलने से नाराज पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने शुक्रवार को मोरिंडा स्थित अपने आवास पर सांसदों, विधायकों और हलका इंचार्जों की अहम बैठक बुलाई। इस बैठक को कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
बैठक में पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू, पूर्व उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी, पूर्व विधायक गुरप्रीत कांगड़, नाजर सिंह मानशाहिया, दविंदर सिंह घुबाया, इंदरवीर सिंह बुलारिया, लखबीर लक्खा, तरसेम डीसी, दर्शन बराड़, हरमिंदर सिंह गिल और पूर्व सांसद मोहम्मद सदीक समेत कई नेता पहुंचे।
पूर्व विधायक दर्शन बराड़ ने साफ कहा कि यदि चरणजीत चन्नी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनाया गया तो पंजाब में कांग्रेस के लिए सरकार बनाना मुश्किल होगा।
हाईकमान को ताकत दिखाने की तैयारी
चन्नी के करीबी सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से वह बेहद नाराज हैं और अब आर-पार की लड़ाई का मन बना चुके हैं। समर्थकों की बड़ी मौजूदगी के जरिए वह कांग्रेस नेतृत्व को अपनी राजनीतिक ताकत का एहसास कराना चाहते हैं।
दो मांगें: अध्यक्ष बनाओ या CM फेस घोषित करो
सूत्रों के अनुसार चन्नी की पहली मांग उन्हें पंजाब कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाने की है। यदि ऐसा संभव नहीं होता तो वे चाहते हैं कि 2027 विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया जाए।
कैप्टन मॉडल पर चल रहे चन्नी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष बनने वाला नेता ही सरकार बनने पर मुख्यमंत्री बनता है। 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रदेश अध्यक्ष भी थे और मुख्यमंत्री भी बने। इसी रणनीति के तहत चन्नी भी अध्यक्ष पद पर दावा मजबूत करना चाहते हैं।
राजा वड़िंग से पुराना टकराव
चन्नी गुट लंबे समय से राजा वड़िंग के नेतृत्व पर सवाल उठाता रहा है। पार्टी की बैठकों से लेकर हाईकमान तक चन्नी समर्थक वड़िंग को हटाने की मांग करते रहे हैं। उनका मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष बनने से टिकट वितरण और संगठन पर प्रभाव बढ़ेगा, जिससे मुख्यमंत्री पद की दावेदारी भी मजबूत होगी।
प्लान-बी भी तैयार?
राजनीतिक विश्लेषक पवनदीप शर्मा का कहना है कि यदि कांग्रेस हाईकमान चन्नी की दोनों मांगें ठुकरा देता है तो वह अपने समर्थकों के साथ नई राजनीतिक पार्टी बनाने का विकल्प भी अपना सकते हैं। ऐसा होने पर कांग्रेस के पारंपरिक दलित वोट बैंक में बड़ी सेंध लग सकती है।
समर्थकों की चुप्पी भी दे रही संकेत
हाईकमान की नई नियुक्तियों के बाद चन्नी गुट के प्रमुख नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कोई धन्यवाद संदेश नहीं दिया। इनमें राणा गुरजीत सिंह, परगट सिंह, भारत भूषण आशू और ओपी सोनी जैसे नेता शामिल हैं। इससे भी कांग्रेस के भीतर असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बॉक्स: चन्नी की दो प्रमुख मांगें
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाए।
यदि अध्यक्ष नहीं बनाते तो 2027 चुनाव के लिए मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया जाए।
बॉक्स: बैठक में पहुंचे प्रमुख नेता
भारत भूषण आशू
ओपी सोनी
गुरप्रीत कांगड़
नाजर सिंह मानशाहिया
दविंदर सिंह घुबाया
इंदरवीर सिंह बुलारिया
लखबीर लक्खा
तरसेम डीसी
दर्शन बराड़
हरमिंदर सिंह गिल
मोहम्मद सदीक