नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों से रूस की तेल रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने के बाद देश में पैदा हुए ईंधन संकट से निपटने के लिए भारत ने अहम भूमिका निभाई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने समुद्री मार्ग के जरिए भारत से गैसोलीन (पेट्रोल) का आयात शुरू कर दिया है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले भारत ने अब पेट्रोल की आपूर्ति कर भी रूस की मदद की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेनी हमलों के कारण रूस की कई रिफाइनरियां प्रभावित हुई हैं, जिससे देश में गैसोलीन की कमी पैदा हो गई है। कई क्षेत्रों में ईंधन की राशनिंग की जा रही है, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और गैसोलीन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं।
रॉयटर्स के अनुसार, भारत से अब तक कम से कम 60 हजार मीट्रिक टन गैसोलीन रूस के लिए रवाना किया जा चुका है। दो टैंकरों में करीब 30 से 40 हजार मीट्रिक टन ईंधन भेजा गया है। हालांकि, यह जानकारी सामने नहीं आई है कि भारत की किस रिफाइनरी से यह आपूर्ति की जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस केवल भारत पर निर्भर नहीं रहेगा। वह भारत के अलावा बेलारूस और अन्य देशों से भी हर महीने करीब 4 लाख मीट्रिक टन गैसोलीन आयात करने की योजना बना रहा है। बेलारूस ने भी रूस को अपनी ईंधन आपूर्ति बढ़ा दी है और जून के पहले पखवाड़े में रेल मार्ग से भेजे जाने वाले गैसोलीन की मात्रा लगभग तीन गुना कर दी।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी स्वीकार कर चुके हैं कि यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने देश की रिफाइनिंग क्षमता को प्रभावित किया है। गर्मियों के दौरान रूस में प्रतिदिन लगभग 1.10 लाख टन गैसोलीन की खपत होती है। घरेलू उत्पादन घटने के कारण सरकार को आयात का सहारा लेना पड़ रहा है। इसी को देखते हुए रूस की संसद ने ईंधन आयात को बढ़ावा देने और सब्सिडी देने के लिए कर नियमों में भी बदलाव किया है।
गौरतलब है कि भारत इस समय रूस से कच्चा तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश भी बना हुआ है। शिप ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में भारत ने रूस से प्रतिदिन करीब 27 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। जून में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की खरीद और बढ़ा दी है।