श्रमिक जनसंख्या अनुपात 57% पहुंचा, बेरोजगारी दर सिर्फ 3.5%; अमृतसर में रोजगार की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर

लुधियाना (Narendra Singh Danu) : पंजाब में रोजगार के मामले में लुधियाना सबसे आगे निकलकर उभरा है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों पर आधारित नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, लुधियाना का श्रमिक जनसंख्या अनुपात (वर्कर पॉपुलेशन रेशियो) 57 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो दिल्ली (41.2 प्रतिशत) और फरीदाबाद (44 प्रतिशत) से बेहतर है। वहीं नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत है, जो कई बड़े शहरों के बराबर या उनसे अधिक है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लुधियाना में विनिर्माण, ऑटोमोबाइल और कपड़ा उद्योगों के विस्तार से रोजगार के अवसर लगातार बढ़े हैं। कुशल श्रमिकों की बढ़ती मांग को देखते हुए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में नए तकनीकी पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, शहर में 34.7 प्रतिशत लोग स्वरोजगार से जुड़े हैं, जबकि केवल 2.3 प्रतिशत लोग आकस्मिक (कैजुअल) श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं। लुधियाना की बेरोजगारी दर 3.5 प्रतिशत है, जो फरीदाबाद (4.9 प्रतिशत) और दिल्ली (5.3 प्रतिशत) से कम है। हालांकि, महिलाओं की श्रम भागीदारी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। शहर में महिलाओं का श्रमिक जनसंख्या अनुपात केवल 22.8 प्रतिशत है। महिलाओं में बेरोजगारी दर 3.8 प्रतिशत जबकि पुरुषों में 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई है।

अमृतसर में रोजगार की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर

रिपोर्ट के अनुसार, अमृतसर में रोजगार के संकेतक लुधियाना की तुलना में कमजोर हैं। यहां श्रमिक जनसंख्या अनुपात 45.8 प्रतिशत है। पुरुषों में यह 69 प्रतिशत जबकि महिलाओं में केवल 21.2 प्रतिशत दर्ज किया गया है। सीमावर्ती जिला होने के कारण सरकार रोजगार बढ़ाने के प्रयास कर रही है, लेकिन अपेक्षित परिणाम अभी सामने नहीं आए हैं।

अमृतसर की कुल बेरोजगारी दर 8.7 प्रतिशत है, जो लुधियाना से काफी अधिक है। पुरुषों में यह 7.6 प्रतिशत और महिलाओं में 12.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। शहर में स्वरोजगार करने वालों की हिस्सेदारी 43.9 प्रतिशत है, जिसमें 49.2 प्रतिशत पुरुष और 25.9 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। वहीं, आकस्मिक श्रमिकों की हिस्सेदारी 11.3 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं की रोजगार भागीदारी में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यह अब भी संतोषजनक स्तर से काफी नीचे बनी हुई है।