समय पर जांच और उपचार से एचआईवी के साथ भी संभव है स्वस्थ जीवन

होशियारपुर (दलजीत अज्नोहा) : एचआईवी/एड्स के बारे में सही जानकारी और समय पर जांच ही इस बीमारी की रोकथाम तथा प्रभावी उपचार की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है। यह जानकारी देते हुए सिविल सर्जन होशियारपुर डॉ. मनदीप कमल ने कहा कि आज भी समाज में एचआईवी को लेकर अनेक प्रकार के भ्रम और डर मौजूद हैं, जिसके कारण बहुत से लोग जांच करवाने से कतराते हैं। यह झिझक न केवल मरीज के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि अनजाने में संक्रमण के फैलाव का कारण भी बन सकती है। उन्होंने कहा कि एचआईवी की समय पर पहचान तथा नियमित एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) के माध्यम से मरीज लंबा, स्वस्थ और सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

डॉ. मनदीप कमल ने बताया कि एचआईवी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को धीरे-धीरे कमजोर कर देता है। शुरुआती चरण में कई बार इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि लगातार बुखार रहना, बार-बार संक्रमण होना, बिना किसी कारण वजन कम होना, लगातार थकान रहना, रात में अत्यधिक पसीना आना, लंबे समय तक दस्त रहना तथा गर्दन या बगल की ग्रंथियों में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत एचआईवी की जांच करवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल लक्षणों के आधार पर एचआईवी का पता नहीं लगाया जा सकता, इसलिए यदि किसी व्यक्ति को संक्रमण का जोखिम रहा हो तो उसे अवश्य जांच करवानी चाहिए।

उन्होंने बताया कि एचआईवी असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त चढ़ाने, संक्रमित सुई या सिरिंज के उपयोग तथा एचआईवी संक्रमित मां से गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान बच्चे में फैल सकता है। समय पर जांच और उपचार से मां से बच्चे में संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि एचआईवी हाथ मिलाने, गले मिलने, साथ बैठने, साथ भोजन करने, पानी पीने, एक ही शौचालय या बर्तनों का उपयोग करने, खांसने, छींकने अथवा मच्छर के काटने से नहीं फैलता। इसलिए एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोगों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव करना गलत है। उन्हें भी समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का पूरा अधिकार है।

उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल, होशियारपुर में एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) सेंटर सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है, जहां एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोगों को निःशुल्क दवाइयां, परामर्श (काउंसलिंग), नियमित फॉलोअप तथा अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों को चिकित्सकों की सलाह के अनुसार नियमित रूप से दवा लेनी चाहिए तथा किसी भी स्थिति में दवा बीच में नहीं छोड़नी चाहिए।

डॉ. मनदीप कमल ने बताया कि जिले के दसूया, मुकेरियां, टांडा और माहिलपुर में स्टैंड अलोन आईसीटीसी (ICTC) सेंटर संचालित हैं, जहां एचआईवी की निःशुल्क, गोपनीय एवं स्वैच्छिक जांच तथा काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध है। इन केंद्रों पर यदि किसी व्यक्ति में एचआईवी की पुष्टि होती है तो उसे आगे के उपचार के लिए जिला अस्पताल, होशियारपुर स्थित ART सेंटर भेजा जाता है।

उन्होंने बताया कि टीबी अस्पताल, होशियारपुर में एफ-आईसीटीसी (F-ICTC) सेंटर भी संचालित है, जहां टीबी मरीजों की एचआईवी जांच की जाती है। यदि किसी टीबी मरीज में एचआईवी की पुष्टि होती है तो उसे तुरंत ART सेंटर भेजकर दोनों बीमारियों का उपचार एक साथ शुरू किया जाता है। वर्तमान में जिले में ऐसे 12 मरीज हैं जो टीबी और एचआईवी दोनों से प्रभावित हैं तथा दोनों बीमारियों की दवाइयां नियमित रूप से ले रहे हैं।

सिविल सर्जन ने बताया कि आज तक जिला होशियारपुर में कुल 3,494 एचआईवी मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें से वर्तमान में 2,328 मरीज ART सेंटर से नियमित उपचार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि यदि मरीज उपचार से जुड़े रहें तो वे स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण जीवन जी सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा एचआईवी की जांच, काउंसलिंग तथा उपचार की सभी सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क एवं गोपनीय रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। लोगों को किसी भी प्रकार के डर या सामाजिक बदनामी के कारण अपनी जांच अथवा उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर जांच न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि परिवार और समाज को भी सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अंत में डॉ. मनदीप कमल ने जिले के लोगों से अपील करते हुए कहा, "एचआईवी को छिपाएं नहीं। समय पर जांच करवाएं, उपचार से जुड़े रहें और दवाइयां कभी भी बीच में न छोड़ें। सही जानकारी अपनाएं, भ्रांतियों से बचें, एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोगों का सम्मान करें और आइए मिलकर एक जागरूक, भेदभाव-मुक्त और स्वस्थ समाज का निर्माण करें।"


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समाचार बॉक्स

एचआईवी के बारे में जरूरी जानकारी

एचआईवी कैसे फैलता है?

* असुरक्षित यौन संबंधों के माध्यम से।
* एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने से।
* संक्रमित सुई या सिरिंज के उपयोग से।
* एचआईवी संक्रमित मां से गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान बच्चे में।


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एचआईवी के संभावित लक्षण

* लगातार बुखार रहना।
* बिना कारण वजन कम होना।
* बार-बार संक्रमण होना।
* लगातार थकान और कमजोरी।
* रात में अत्यधिक पसीना आना।
* लंबे समय तक दस्त रहना।
* गर्दन, बगल या जांघ की ग्रंथियों में सूजन।

नोट: शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं भी हो सकते हैं। इसलिए यदि संक्रमण का जोखिम हो तो जांच अवश्य करवाएं।


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आम भ्रांतियां (Myths)

* हाथ मिलाने या गले मिलने से एचआईवी फैलता है।
* साथ खाना खाने या पानी पीने से एचआईवी हो जाता है।
* मच्छर के काटने से एचआईवी फैलता है।
* एक ही शौचालय या बर्तन इस्तेमाल करने से एचआईवी हो जाता है।
* एचआईवी होने का मतलब जीवन समाप्त हो गया।


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सच्चाई (Facts)

* एचआईवी हाथ मिलाने, गले मिलने, साथ बैठने, भोजन साझा करने या मच्छर के काटने से नहीं फैलता।
* समय पर जांच से बीमारी का जल्दी पता लगाया जा सकता है।
* नियमित ART दवाइयों से वायरस को नियंत्रित रखा जा सकता है।
* एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोग भी लंबा, स्वस्थ और सामान्य जीवन जी सकते हैं।
* एचआईवी पीड़ित व्यक्तियों के साथ भेदभाव नहीं, बल्कि सहयोग और सम्मान करना चाहिए।


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उपचार एवं सरकारी सुविधाएं

* जिला अस्पताल, होशियारपुर में ART सेंटर के माध्यम से निःशुल्क उपचार उपलब्ध है।
* दसूया, मुकेरियां, टांडा और माहिलपुर स्थित स्टैंड अलोन ICTC सेंटर में निःशुल्क एवं गोपनीय एचआईवी जांच तथा काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध है।
* टीबी अस्पताल, होशियारपुर स्थित F-ICTC सेंटर में टीबी मरीजों की एचआईवी जांच की जाती है।
* एचआईवी की पुष्टि होने पर मरीज को ART सेंटर भेजकर निःशुल्क उपचार शुरू किया जाता है।
* चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवाइयां नियमित रूप से लें और उपचार बीच में न छोड़ें।