नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : सिंधु जल संधि को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। केंद्र सरकार का कहना है कि 23 अप्रैल 2025 से संधि को स्थगित (एबेयंस) रखा गया है और जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय एवं स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक इस फैसले में कोई बदलाव नहीं होगा।
इस बीच पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह ने दावा किया है कि उन्होंने पिछले एक वर्ष में भारत के सिंधु जल आयुक्त को चिनाब नदी के जल प्रवाह में उतार-चढ़ाव को लेकर चार पत्र भेजे हैं, लेकिन अब तक किसी का जवाब नहीं मिला। उनका कहना है कि हालिया पत्र में चिनाब के जलस्तर में आए बदलाव पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में शाह ने कहा कि चिनाब नदी के प्रवाह में बदलाव केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि रणनीतिक चिंता का विषय है। उनके मुताबिक जल प्रवाह से जुड़ा नियमित डेटा नहीं मिलने से यह तय करना कठिन हो जाता है कि बदलाव प्राकृतिक कारणों से हुआ है या ऊपरी हिस्से में किसी परियोजना के संचालन के कारण।
पहलगाम हमले के बाद बदला भारत का रुख
भारत ने 23 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। सरकार का स्पष्ट कहना है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते। इसलिए पाकिस्तान के खिलाफ नीति में तब तक बदलाव नहीं होगा, जब तक वह आतंकवाद पर निर्णायक कार्रवाई नहीं करता।
क्या है सिंधु जल संधि?
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि हुई थी। इसके तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का जल भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के अधिकांश जल पर पाकिस्तान का अधिकार तय किया गया। संधि में जल प्रवाह संबंधी आंकड़े साझा करने, निरीक्षण और विवाद समाधान की व्यवस्था भी शामिल थी।
पाकिस्तान की बढ़ी चिंता
पाकिस्तान का कहना है कि उसने संधि के तहत डेटा साझा करना जारी रखा है और कई बार बैठक, संयुक्त निरीक्षण तथा परियोजनाओं की जानकारी देने का आग्रह किया है, लेकिन भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उसके अनुसार मई 2022 के बाद दोनों देशों के सिंधु जल आयुक्तों की कोई बैठक नहीं हुई है।
भारत का फोकस अपने जल अधिकारों पर
हाल के महीनों में भारत ने संकेत दिए हैं कि वह पश्चिमी नदियों पर संधि के तहत मिले अपने वैध अधिकारों का अधिकतम उपयोग करेगा। सरकार का मानना है कि अब तक इन अधिकारों का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है और भविष्य में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
फिलहाल भारत ने साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि की पुरानी व्यवस्था तभी बहाल होगी, जब पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी और स्थायी कार्रवाई करेगा। ऐसे में जल सहयोग का मुद्दा अब केवल तकनीकी या कूटनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ गया है।