2006 में घोषित एनआईएचईए परियोजना अब तक फाइलों तक सीमित, विशेषज्ञ कोर्स शुरू नहीं हो सके

चंडीगढ़ (Narendra Singh Danu) : देश में आधुनिक अस्पतालों की डिजाइन और स्वास्थ्य ढांचे के लिए विशेषज्ञ तैयार करने की महत्वाकांक्षी योजना दो दशक बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। वर्ष 2006 में पीजीआई में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थकेयर इंजीनियरिंग एंड आर्किटेक्चर (NIHEA) स्थापित करने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक यह परियोजना केवल प्रस्तावों और बैठकों तक ही सीमित है।

योजना के तहत हेल्थ फैसिलिटी प्लानिंग, डिजाइनिंग और हेल्थकेयर इंजीनियरिंग जैसे विशेष मास्टर डिग्री कोर्स शुरू किए जाने थे, ताकि अस्पतालों के निर्माण और स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार किए जा सकें। स्वास्थ्य मंत्रालय ने वर्ष 2007 में पीजीआई को संस्थान स्थापित करने के निर्देश दिए थे और इसके लिए हर वर्ष लगभग सात करोड़ रुपये के बजट का आश्वासन भी दिया गया था।

हालांकि, परियोजना को शुरुआत से ही प्रशासनिक असमंजस का सामना करना पड़ा। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने पीजीआई की भूमिका स्पष्ट न होने का हवाला देते हुए प्रस्ताव रोक दिया था। बाद में गवर्निंग बॉडी ने भी इसे पीजीआई के मूल दायित्वों से बाहर बताया।

इसके बावजूद वर्ष 2016 से 2021 के बीच गठित विभिन्न समितियों ने कई सुझाव दिए, जिनमें पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC), चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर और यूआईईटी के सहयोग से पाठ्यक्रम तैयार करने की सिफारिश शामिल थी। मार्च 2024 में एक बार फिर स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने स्पष्ट किया कि यह संस्थान पीजीआई के कोर मैंडेट में नहीं आता।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ऐसे संस्थान की स्थापना आईआईटी रोपड़ या चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर जैसे तकनीकी संस्थानों में अधिक उपयुक्त होगी। दो दशकों से लंबित यह परियोजना अभी भी निर्णय और क्रियान्वयन के इंतजार में है, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसके शुरू होने से देश में स्वास्थ्य अवसंरचना को नई दिशा मिल सकती थी।