होशियारपुर (दलजीत अजनोहा) : दिव्य ज्योति जागृति संस्थान (DJJS) द्वारा स्थानीय आश्रम गौतम नगर,होशियारपुर में रविवार सत्संग का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सत्संग का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनमानस को जागरूक करना रहा।
इस अवसर पर साध्वी मीमांसा भारती जी ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में कहा कि प्रकृति ईश्वर का अनुपम उपहार है। वायु, जल, वनस्पति, औषधीय पौधे, फल, फूल एवं अन्न जैसी अनमोल धरोहरें हमें प्रकृति से ही प्राप्त होती हैं। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तभी मानव जीवन भी सुरक्षित और स्वस्थ रह सकेगा। उन्होंने कहा कि आज बढ़ता प्रदूषण, वनों की कटाई एवं प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन पृथ्वी के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। ऐसे समय में प्रत्येक व्यक्ति का यह नैतिक दायित्व है कि वह अधिक से अधिक वृक्ष लगाए, उनका संरक्षण करे तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ एवं हरित वातावरण का निर्माण करने में अपना योगदान दे।
कार्यक्रम के दौरान साध्वी शंकरप्रीता भारती जी, साध्वी पूनम भारती जी, साध्वी मीमांसा भारती जी एवं साध्वी राजविद्या भारती जी,साध्वी रणे भारती जी,साध्वी रेणु भारती जी ने दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के 'संरक्षण प्रोजेक्ट' के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संस्थान केवल आध्यात्मिक उत्थान के साथ-साथ, सामाजिक एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्वों के निर्वहन के लिए भी निरंतर कार्यरत है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपने जीवन में पर्यावरण संरक्षण को एक संस्कार के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं के बीच फलदार एवं छायादार पौधों का वितरण किया गया तथा उन्हें इन पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। इसके पश्चात संगत ने सामूहिक रूप से पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में अधिक से अधिक वृक्ष लगाएंगे, लगाए गए पौधों की देखभाल करेंगे तथा अपने परिवार, समाज एवं आसपास के लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करेंगे। सभी ने यह भी प्रतिज्ञा की कि "एक व्यक्ति–एक पौधा" के संकल्प को जन-जन तक पहुँचाकर धरती को हरा-भरा एवं प्रदूषण मुक्त बनाने में अपना सक्रिय योगदान देंगे।
सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ प्रकृति के प्रति कर्तव्यबोध का संदेश भी प्रभावी रूप से प्रसारित किया गया, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने अत्यंत सराहा।