नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : कांग्रेस ने केंद्र सरकार की प्रस्तावित ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी योजना (वीबी-जी राम जी)’ को लेकर कई राज्यों द्वारा आपत्तियां जताए जाने का दावा किया है। पार्टी का कहना है कि मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड सहित कुछ भाजपा शासित राज्यों ने इस नई व्यवस्था से राज्यों पर बढ़ने वाले वित्तीय बोझ को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि ग्रामीण विकास मंत्री के गृह राज्य सहित कई राज्यों ने योजना को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इस योजना को लागू करने से पहले न तो संसदीय स्थायी समिति से पर्याप्त चर्चा की और न ही राज्यों व अन्य हितधारकों से व्यापक परामर्श किया।
जयराम रमेश के अनुसार, कई राज्यों का मानना है कि नई योजना के तहत वित्तीय हिस्सेदारी का बोझ बढ़ने से उनके बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। साथ ही कुछ राज्यों ने खेती के व्यस्त मौसम में प्रस्तावित “ब्लैकआउट अवधि” का विरोध किया है, क्योंकि इससे ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध न होने से कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कम से कम पांच राज्यों ने ग्रामीण श्रमिकों की मजदूरी बढ़ाने की मांग की है, ताकि महंगाई और जीवन-यापन की लागत के अनुरूप उनकी आय सुनिश्चित की जा सके।
कांग्रेस का कहना है कि 1 जुलाई से मनरेगा के स्थान पर लागू की जा रही इस नई योजना को लेकर राज्यों में असंतोष बढ़ रहा है। पार्टी के अनुसार, मनरेगा जहां ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी देती थी, वहीं नई व्यवस्था से केंद्र की भूमिका अधिक केंद्रीकृत होने और राज्यों पर वित्तीय दबाव बढ़ने की आशंका है।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राजनीतिक कारणों से प्रेरित होकर मनरेगा को समाप्त किया है और किसी भी बड़े बदलाव से पहले व्यापक चर्चा व सहमति जरूरी थी।