संघर्ष, सत्य और सेवा की जीत

पुणे: यह कहावत कि "सत्य और संघर्ष अंततः विजय दिलाते हैं" का सजीव उदाहरण हैं उदय श्रीरंग महाजन।

पुणे के कोरेगांव पार्क स्थित शासकीय आदिवासी बालक छात्रावास में वार्डन के रूप में कार्यरत रहे उदय महाजन का चयन महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा आदिवासी विकास विभाग में वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी (वर्ग-1) पद पर हुआ है। यह नियुक्ति एक लंबे कानूनी संघर्ष के बाद महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (MAT) के निर्देशों के फलस्वरूप संभव हुई, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि सत्य और न्याय की अंततः विजय होती है।

इस उल्लेखनीय उपलब्धि के उपलक्ष्य में छात्रावास के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों द्वारा महाजन का भावपूर्ण विदाई समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भगवान वैराट, वृषाली घैसास, सुनील पवार, अर्चना पवार, सुनील वाघमारे तथा फिरोज शेख मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अतिथियों ने महाजन द्वारा आदिवासी विद्यार्थियों के शैक्षणिक, व्यक्तिगत एवं सर्वांगीण विकास के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों की सराहना की। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं के मार्गदर्शन, उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरणा, व्यक्तित्व विकास, अनुशासित कार्यशैली तथा विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के सफल आयोजन को विशेष रूप से रेखांकित किया।

अपने विदाई भाषण में उदय महाजन ने अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, पूर्व विद्यार्थियों तथा सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नए पद पर भी वे आदिवासी समाज और विद्यार्थियों के कल्याण के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करते रहेंगे।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी, पूर्व विद्यार्थी तथा वर्तमान विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने पुष्पगुच्छ, शॉल और स्मृति-चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया।

इस अवसर पर एकात्मिक आदिवासी विकास परियोजना, घोडेगांव के परियोजना अधिकारी श्री प्रदीप देसाई ने महाजन को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ईमानदारी, संघर्ष और निरंतर परिश्रम से प्राप्त सफलता समाज के लिए प्रेरणास्रोत होती है। उन्होंने कहा कि छात्रावास के वार्डन के रूप में महाजन ने आदिवासी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी के रूप में उनका चयन आदिवासी विकास विभाग के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महाजन का शोध एवं प्रशासनिक अनुभव भविष्य में आदिवासी समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उदय महाजन की यह यात्रा केवल पदोन्नति की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, न्याय, सेवा और समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल है, जो युवाओं तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।