पंजाब राज्य खाद्य आयोग ने एआई विशेषज्ञ के साथ किया मंथन; रियल-टाइम मॉनिटरिंग, स्मार्ट शिकायत निवारण और डेटा विश्लेषण पर रहेगा फोकस

चंडीगढ़ (Narendra Singh Danu) : पंजाब में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 के क्रियान्वयन को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में पंजाब राज्य खाद्य आयोग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को अपनाने की पहल शुरू कर दी है। इसी उद्देश्य से आयोग ने एआई विशेषज्ञ निपुण स्याल के साथ एक विशेष विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया, जिसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए आयोग के चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा ने कहा कि आयोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी, शिकायतों के निस्तारण और नीतिगत सुधारों के लिए सरकार को सुझाव देने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पारंपरिक निगरानी प्रणाली से आगे बढ़कर रियल-टाइम और डेटा-आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

एआई विशेषज्ञ निपुण स्याल ने आयोग को बताया कि एआई आधारित एनालिटिक्स के माध्यम से उचित मूल्य की दुकानों (एफपीएस) पर होने वाले ई-पीओएस लेन-देन का प्रतिदिन विश्लेषण किया जा सकता है। इससे कम राशन वितरण, लंबे समय तक बंद रहने वाले डिपो और आवंटित एवं वितरित खाद्यान्न के बीच अंतर जैसी अनियमितताओं का समय रहते पता लगाया जा सकेगा, जिससे त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई संभव होगी।

उन्होंने बताया कि मशीन लर्निंग तकनीक लाभार्थियों के डाटाबेस में संभावित डुप्लीकेट प्रविष्टियों, गलत सूचनाओं और अधूरे विवरणों की पहचान कर डेटा की गुणवत्ता और शुद्धता बढ़ाने में भी मददगार साबित होगी।

शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए एआई आधारित बहुभाषी चैटबॉट और पंजाबी भाषा में वॉयस असिस्टेंट विकसित करने का भी सुझाव दिया गया। इससे लाभार्थी 24 घंटे शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उन्हें त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

बैठक में आयोग के सदस्य जसवीर सिंह सेखों, विजय दत्त, चेतन प्रकाश ढालीवाल, सदस्य सचिव कनू थिंद तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।