नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : केंद्र सरकार ने खाद्य कारोबार को आसान बनाने (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के लाइसेंसिंग एवं पंजीकरण नियमों में संशोधन अधिसूचित किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, नए नियमों से विशेष रूप से छोटे और मध्यम खाद्य कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम होगा।
संशोधित नियमों के तहत अब 'फर्स्ट इन फर्स्ट आउट' (FIFO) और 'फर्स्ट एक्सपायरी फर्स्ट आउट' (FEFO) जैसे स्टॉक रोटेशन एवं रिकॉर्ड रखने के प्रावधान केवल खाद्य निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) इकाइयों पर लागू होंगे। पहले यह व्यवस्था सभी प्रकार के खाद्य व्यवसायों के लिए अनिवार्य थी।
सरकार ने रिटेल दुकानदारों और अन्य गैर-निर्माण खाद्य व्यवसायों को इन नियमों से छूट प्रदान कर दी है। इससे किराना दुकानों, छोटे व्यापारियों और अन्य खाद्य विक्रेताओं को रिकॉर्ड रखने की जटिल प्रक्रिया से राहत मिलेगी और उनके लिए कारोबार करना अधिक आसान होगा।
हालांकि मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जहां खाद्य सुरक्षा और उत्पादों की ट्रेसबिलिटी आवश्यक होगी, वहां मौजूदा सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन जारी रहेगा। उपभोक्ताओं की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यह संशोधन जोखिम-आधारित और परिणाम-आधारित नियमन को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया कदम है। इससे पहले भी सरकार लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाने, स्थायी लाइसेंस की सुविधा उपलब्ध कराने तथा स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए नियमों में राहत जैसे कई सुधार लागू कर चुकी है।
मंत्रालय ने बताया कि यह संशोधन राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और विभिन्न हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया गया है तथा यह नीति आयोग की सिफारिशों के अनुरूप है। सरकार का मानना है कि नए नियम खाद्य क्षेत्र में कारोबार को अधिक सरल बनाएंगे, जबकि आवश्यक क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा के मानकों को पहले की तरह मजबूत बनाए रखा जाएगा।