कुरुक्षेत्र (परमिंदर सिंह) : सीनियर मेडिकल ऑफिसर एवं डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉ. आशीष अनेजा ने कहा कि आधुनिक तनावपूर्ण और गतिहीन जीवनशैली के कारण होने वाली बीमारियों से बचने के लिए योग और अनुशासित दिनचर्या अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन की एक प्रभावी विधा है। आज की खराब खानपान की आदतों और अनियमित जीवनशैली के कारण डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोग जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिनसे बचाव के लिए योग एक श्रेष्ठ प्राकृतिक चिकित्सा के रूप में कार्य करता है।
यह न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि रोगों की रोकथाम और नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ. अनेजा ने योगाभ्यास के लिए कुछ आवश्यक नियमों का पालन करने की सलाह देते हुए कहा कि योग हमेशा सुबह खाली पेट करना चाहिए, अभ्यास के दौरान श्वास पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा अपनी क्षमता के अनुसार ही आसन करना चाहिए और शरीर पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए। उन्होंने बताया कि कपालभाति और अनुलोम-विलोम प्राणायाम रक्त संचार को बेहतर बनाकर हृदय को मजबूत करते हैं। डायबिटीज के नियंत्रण और बचाव के लिए मंडूकासन एवं धनुरासन लाभकारी हैं, क्योंकि ये अग्न्याशय सहित पेट के अंगों पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं, जिससे इंसुलिन स्राव और संवेदनशीलता में सुधार हो सकता है। मोटापा कम करने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए त्रिकोणासन और भुजंगासन उपयोगी बताए गए। वहीं तनाव और मानसिक थकान दूर करने के लिए शवासन और ध्यान का अभ्यास करने की सलाह दी गई, जो तनाव से जुड़े हार्मोन कॉर्टिसोल के स्तर को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
डॉ. अनेजा ने संतुलित एवं सात्विक आहार अपनाने, ताजे फल, हरी सब्जियां और अंकुरित अनाज को भोजन में शामिल करने, जंक फूड एवं अत्यधिक तैलीय खाद्य पदार्थों से परहेज करने, समय पर सोने-जागने तथा पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पीने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि योग और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर व्यक्ति अधिक स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान जीवन जी सकता है। योग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह अनुशासन और संतुलित जीवन जीने की कला सिखाता है तथा इसे किसी भी उम्र में अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार शुरू किया जा सकता है।