नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) :राजधानी में आगामी मॉनसून को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में बुधवार को दिल्ली सचिवालय में आयोजित एपेक्स कमेटी की उच्च स्तरीय बैठक में तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘फ्लड कंट्रोल ऑर्डर-2026’ जारी किया, जो सभी विभागों के लिए एक गाइडलाइन दस्तावेज़ के रूप में काम करेगा। इसमें जल निकासी, तटबंधों की मजबूती, पंपिंग सिस्टम, ऑपरेशनल प्लान और कंट्रोल रूम की जानकारी शामिल है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राजधानी के सभी जलभराव वाले स्थानों पर नोडल अधिकारी तैनात किए जाएं। किसी भी क्षेत्र में जलभराव होने पर संबंधित अधिकारी को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। सभी विभागों को मॉनसून के दौरान अलर्ट मोड पर रहने और आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
अधिकारियों ने बताया कि 15 जून से केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24×7 सक्रिय कर दिया गया है। राहत और बचाव कार्यों के लिए नावों, मोटरबोट, पंप और अन्य उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, इस वर्ष 77 नालों से 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद हटाई गई है। पंपों की संख्या बढ़ाकर 243 से अधिक कर दी गई है, जबकि नावों की संख्या 41 तक पहुंचा दी गई है।
यमुना के जलस्तर की निगरानी के लिए एक आधुनिक डिजिटल सिस्टम भी विकसित किया गया है, जिससे रियल-टाइम डेटा उपलब्ध रहेगा। तटबंधों को मजबूत किया गया है और संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त शुरू कर दी गई है।
एमसीडी ने भी जानकारी दी कि सभी 12 जोनों में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं और संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है।
बैठक में किराड़ी, मुंडका, रोहतक रोड और बुराड़ी जैसे संवेदनशील इलाकों में जलभराव की समस्या पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का दावा है कि इस बार मॉनसून के दौरान राजधानी में जलभराव की समस्या को न्यूनतम करने के लिए सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम करेंगी।