वजीर नगर और चौशाला में प्राकृतिक खेती शिविर: 12 साल की उपलब्धियों के बीच किसानों ने सीखे लागत घटाने के गुर

‎कलायत ‎(रवि जैस्ट) : कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा कलायत खंड के गांव वज़ीर नगर और चौशाला में एक दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। उपनिदेशक डॉ. रविंद्र हुड्डा के मार्गदर्शन और खंड कृषि अधिकारी डॉ. विजय मान के सफल नेतृत्व में आयोजित इस शिविर में भारी संख्या में स्थानीय किसानों ने हिस्सा लिया। शिविर की अध्यक्षता करते हुए डॉ. विजय मान ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड और विभिन्न अनुदानों के जरिए किसानों की लागत कम करने व आय बढ़ाने के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। इस दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों डॉ. रमेश वर्मा और डॉ. दीपक ने किसानों को सचेत किया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से धरती की उर्वरा शक्ति क्षीण हो रही है और मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है, जिसका एकमात्र और स्थायी समाधान प्राकृतिक खेती ही है।

‎विशेषज्ञों से सीखी जीवामृत बनाने की विधि, किसानों ने लिया प्राकृतिक खेती शुरू करने का संकल्प

‎शिविर के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों डॉ. जोगिन्द्र सिंह और डॉ. विशाल द्वारा किसानों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत और मल्चिंग की व्यावहारिक जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि 200 लीटर क्षमता के ड्रम में 180 लीटर पानी, 10 लीटर देसी गाय का गौमूत्र, 10 किलो गोबर, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन और 1 किलो पेड़ के नीचे की उपजाऊ मिट्टी को मिलाकर, चार दिनों तक सुबह-शाम डंडे से घुमाकर बेहतरीन जीवामृत तैयार किया जा सकता है, जो फसलों की वृद्धि और भूमि की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। उपनिदेशक डॉ. रविंद्र हुड्डा ने कहा कि कैथल जिला प्राकृतिक खेती में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और विभाग का लक्ष्य हर गांव को इससे जोड़ना है। शिविर के अंत में कृषि अधिकारियों द्वारा किसानों की शंकाओं का समाधान किया गया।