चंडीगढ़ (Narendra Singh Danu): पंजाब में मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से आज से विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान शुरू किया जा रहा है। इस व्यापक प्रक्रिया के तहत राज्य के 2 करोड़ 14 लाख 57 हजार 160 मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
फर्जी, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम होंगे हटाए
निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है। सत्यापन के दौरान फर्जी, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे, जबकि पात्र मतदाताओं का विवरण अपडेट किया जाएगा।
25 जून से घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ
अभियान की शुरुआत बीएलओ (Booth Level Officer) के प्रशिक्षण और प्रारंभिक तैयारियों से की जा रही है, जो 24 जून तक चलेगी। इसके बाद 25 जून से 24 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं के फॉर्म भरवाएंगे।
आयोग के अनुसार प्रत्येक बीएलओ को औसतन 300 घरों और लगभग 1200 मतदाताओं के सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
तीन बार संपर्क करेंगे बीएलओ
मतदाताओं को फॉर्म उपलब्ध कराने के बाद बीएलओ उन्हें वापस लेने के लिए अधिकतम तीन बार संपर्क करेंगे। सत्यापन के दौरान जन्मतिथि, पारिवारिक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा।
विशेष रूप से ऐसे मतदाताओं के रिकॉर्ड की भी जांच होगी जिनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं था, लेकिन उनके माता-पिता या दादा-दादी के नाम उस सूची में मौजूद थे।
3 अगस्त को प्रकाशित होगा ड्राफ्ट
निर्वाचन आयोग द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार:
3 अगस्त 2026: प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची का प्रकाशन
3 अगस्त से 2 सितंबर 2026: दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि
1 अक्टूबर 2026: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
आधार केवल पहचान का माध्यम
आयोग ने स्पष्ट किया है कि Aadhaar Card को केवल पहचान के एक स्रोत के रूप में स्वीकार किया जाएगा। इसे मतदाता की पात्रता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाएगा।
ऑनलाइन भी मिलेगी सुविधा
मतदाता आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने पुराने रिकॉर्ड और मतदाता संबंधी जानकारी की जांच कर सकेंगे।
नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भरना होगा।
विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक (जिन्होंने किसी अन्य देश की नागरिकता नहीं ली है) फॉर्म-6ए भरकर अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करा सकते हैं।
निर्वाचन आयोग का मानना है कि यह अभियान राज्य की मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।