इंदौर/धार (Narendra Singh Danu) : ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में शामिल विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को धार जिले की ऐतिहासिक नगरी मांडू का दौरा किया, जहां उन्होंने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली और स्थापत्य कला को करीब से देखा।
मांडू पहुंचने पर विदेशी मेहमानों का मालवी परंपरा के अनुसार भव्य स्वागत किया गया। पारंपरिक नृत्य और लोकवाद्य की थाप पर प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बना दिया, जिसमें कई प्रतिनिधि खुद भी शामिल होकर थिरकते नजर आए।
जहाज महल और जल प्रबंधन प्रणाली ने किया प्रभावित
प्रतिनिधिमंडल ने ऐतिहासिक जहाज महल का भ्रमण किया और उसकी अनूठी वास्तुकला की सराहना की। दो तालाबों के बीच स्थित इस संरचना और 500 वर्ष पुरानी जल-संरक्षण प्रणाली ने विदेशी मेहमानों को खासा प्रभावित किया।
बाग प्रिंट और हस्तशिल्प का भी लिया अनुभव
मेहमानों ने मांडू में लगाए गए बाग प्रिंट स्टॉल का अवलोकन किया और पारंपरिक हस्तशिल्प कला को करीब से समझा। डेमोंस्ट्रेशन के दौरान उन्होंने खुद भी डिजाइन बनाने का अनुभव लिया और शिल्पकारों की कला की सराहना की।
संरक्षण तकनीकों में दिखाई दिलचस्पी
जहाज महल परिसर स्थित संरक्षण प्रयोगशाला में प्रतिनिधियों ने पारंपरिक निर्माण सामग्री ‘मोर्टार’ बनाने की प्रक्रिया जानी, जिसमें प्राकृतिक तत्वों का उपयोग किया जाता है। इसे ऐतिहासिक इमारतों की मजबूती का अहम आधार बताया गया।
लाइट एंड साउंड शो और गाला डिनर रहा आकर्षण
शाम को आयोजित लाइट एंड साउंड शो में मांडू के ऐतिहासिक वैभव को जीवंत किया गया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सम्मान में गाला डिनर आयोजित किया गया, जिसमें मालवा के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद परोसा गया।
प्रतिनिधियों ने दी प्रतिक्रिया
विदेशी मेहमानों ने मांडू को भारत की सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि यह स्थल जलवायु परिवर्तन के दौर में प्राचीन जल संरक्षण तकनीकों का जीवंत उदाहरण है।
इस दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।