इंदौर (Narendra Singh Danu) : मध्य प्रदेश का इंदौर शहर इन दिनों वैश्विक कृषि कूटनीति का केंद्र बना हुआ है। भारत की अध्यक्षता में चल रहे पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के तीसरे दिन खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, किसानों की आय और आधुनिक कृषि तकनीकों पर गहन चर्चा हुई।
सम्मेलन में ब्रिक्स देशों सहित करीब 20 देशों के कृषि मंत्री, नीति विशेषज्ञ और वैज्ञानिक शामिल हैं। संयुक्त घोषणा-पत्र (जॉइंट डिक्लेरेशन) के मसौदे का पहला चरण पूरा हो चुका है, जबकि आगे की चर्चा जारी है। शाम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा विदेशी प्रतिनिधियों के सम्मान में आयोजित रात्रिभोज में निवेश और सहयोग के अवसरों पर भी बातचीत होगी।
खाद्य सुरक्षा पर वैश्विक चिंता
विशेषज्ञों ने चेताया कि बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के चलते खाद्य सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। टिकाऊ उत्पादन, सप्लाई चेन मजबूत करने और खाद्य हानि कम करने पर विशेष जोर दिया गया।
तकनीक बनेगी किसानों की ताकत
सम्मेलन में स्पष्ट हुआ कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए तकनीक अहम भूमिका निभाएगी। ड्रोन, प्रिसिजन फार्मिंग, डिजिटल एग्रीकल्चर और ई-मार्केटिंग जैसे समाधान किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने और लागत कम करने में मददगार होंगे।
जलवायु संकट पर फोकस
अनियमित मानसून, सूखा और बाढ़ जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए ‘क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर’ और ‘सस्टेनेबल फार्मिंग’ को अपनाने पर सहमति बनी। जल संरक्षण, जैविक खेती और मृदा सुधार को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
कृषि व्यापार और सहयोग को बढ़ावा
ब्रिक्स देशों के बीच कृषि व्यापार आसान बनाने और रिसर्च में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सहयोग वैश्विक खाद्य प्रणाली को अधिक मजबूत और संतुलित बनाएगा।
आगे की रणनीति पर नजर
12 जून को कृषि मंत्रियों का विशेष संवाद और 13 जून को मुख्य बैठक आयोजित होगी, जिसमें भविष्य की रणनीति और साझा कार्ययोजना तय की जाएगी।
‘ब्रिक्स वाटिका’ से हरित संदेश
सम्मेलन के दौरान ‘ब्रिक्स वाटिका’ विकसित की जाएगी, जहां सभी देशों के प्रतिनिधि पौधारोपण करेंगे। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का प्रतीक बनेगी।